ज़िंदगी का फलसफा

ज़िंदगी जीना मुश्किल मौत बड़ी आसान हस्ना यहां मुस्किल रोना आसान खुशियां देना मुश्किल दुख मिले आसान मंजिल मिले मुश्किल गम मिले बड़े आसान तारीफ मिले मुश्किल बदनामी मिले आसान मीठे बोल मिले मुश्किल गाली मिले बड़े आसान घर मिलना बड़ा मुश्किल खोना बड़ा आसान यानी हर अच्छे काम बहुत मुश्किल और बुरे आसान

Save girls’

जन्म से पहले ही देते मार जिल्लत की ज़िन्दगी भी स्वीकार कहते लड़की को बेकार केसे हो गए है हमारे संस्कार देते मुझे जो थोड़ी आजादी होने ना दू मै देश की बरबादी मिले मुझे भी वो हकदार तो करू मै भी कुछ नए आविष्कार बंद लो अकल की ये पेटी पढ़ाई लिखाई तुम सब अपनी बेटी

कमाऊ केसे मै दो रोटी

कमाऊ केसे मै दो रोटी उम्र है मेरी बहुत छोटी जगह जगह मैंने रोटी खोजी कभी कभी तो भूखी सोती जब हुई थोड़ी सी सयानी की नहीं कोई भी मनन मानी दुनिया से थी मै अनजान करते थे जो मेरा अपमान मा बाप की छाया जो होती यही सोचकर बस मै रोती तरीक़ा लगता जो आसान करती थी मै वहीं काम पेट का भरता नहीं था कोटा पकड़ लिया मैंने ऐसा कोठा जहां सारी औरत थी मजबुर सबको बोलती थी हुजूर वह ना बनता किसी से रिश्ता फिर भी रोज लेते थे हिस्सा दुःख से भरी है मेरी कहानी शायद ना मिले किसी को ऐसी जिंदगानी

इंसाफ

तीन साल की बेटी मेरी लूटा दू , उस पर दुनिया सारी सकल है उसकी बिलकुल भोली बाते तो है मीठी गोली हूं मैं थोड़ी सी मजबुर जो हो जाती हूं उससे दुर हुई एक दिन ऐसी घटना घर पर कोई नहीं था अपना जिसमें बस्ती मेरी जान ले गया उसको कोई सेतान कर दिया मेरी बेटी को गंदा उस दरिंदे को मै दिला बी ना पाई फासी का फंदा चिल्लाई होगी मेरी बच्ची झूट नहीं ये घटना सच्ची अपने नजरियों को कार्लो साफ दिलादो बच्ची। के इंसाफ